भारतीय क्रिकेटर्स जिन्हें नसीब नहीं हुआ विदाई मैच

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सुनील गावस्कर का 1987 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच ही आखिरी रहा और इसके बाद वह कभी मैदान पर नजर नहीं आए।

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मोहम्मद अजरुद्दीन बतौर कप्तान सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले इकलौते खिलाड़ी थे लेकिन मैच फिक्सिंग ने उनका करियर बर्बाद कर दिया और उनकी क्रिकेट से सम्मानजनक विदाई नहीं हो पाई।

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भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में हजारों रन बनाने वाले राहुल द्रविड़ भी विदाई मैच के लिए तरसते रह गए थे।

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वीरेंद्र सहवाग विस्फोटक खिलाड़ियों में  से एक रहे, उन्होंने वनडे में दोहरा शतक भी जड़ा लेकिन सहवाग को विदाई मैच नसीब नहीं हो सका।

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वैरी स्पेशल कहे जाने वाले वीवीएस लक्ष्मण टेस्ट क्रिकेट के मजबूत बल्लेबाज रहे लेकिन विदाई मैच उन्हें भी नसीब नहीं हुआ।

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जहीर खान ने अपनी घातक गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम को कई मैच जिताए, लेकिन उन्हें विदाई मैच खेलने को नहीं मिला।

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गौतम गंभीर ने भारत को 2007 टी 20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी लेकिन उन्हें भी बिना विदाई मैच के ही संन्यास लेना पड़ा।

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टी 20 क्रिकेट में छह गेंदों पर छह छक्के लगाने का कारनामा कर चुके युवराज सिंह को भी बिना विदाई मैच खेले ही संन्यास का ऐलान करना पड़ा था।

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भारत के सबसे ज्यादा टैलेंटेड ऑलराउंडर में से एक रहे इरफान पठान ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से बिना विदाई मैच खेले दूरी बना ली।

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महान फिनिशर और भारत को 2011 विश्व कप दिलाने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी बिना विदाई मैच खेले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से रुख्सत हो गए।

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धोनी की तरह ही सुरेश रैना को भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को बिना विदाई मैच के ही अलविदा कहना पड़ा ।

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स्टार ऑलराउंडर युसुफ पठान 2011 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे लेकिन उन्हें भी विदाई मैच नहीं मिला।