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क्या होते थे 80 के दशक के खिलाडियों के फिट रहने के ड्रिल्स

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मूल रूप से  टेनिस में दो तरह के ड्रिल  प्रयोग में होते रहे   हैं, इनमें ऑन-कोर्ट और ऑफ-कोर्ट ड्रिल  हैं।

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ऑन-कोर्ट ड्रिल और ऑफ-कोर्ट ड्रिल के बीच  खास अंतर यह है कि ऑन-कोर्ट ड्रिल आपको अपने शॉट्स को दिशा के अनुसार समझने में मदद करता है।

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ऑफ-कोर्ट ड्रिल आपके स्टेमिना को बढ़ाने में मदद करता है, कोर्ट के आसपास अपनी मांसपेशियों को मजबूत करता है।

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ऑन-कोर्ट  के  तहत  भी तीन तरह के ड्रिल होते हैं जो खिलाड़ियों  के लिए मददगार होते हैं। इनमें सर्व टेनिस ड्रिल, बैकहैंड स्लाइस ड्रिल और फोर हेंड ड्रिल।

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फुटबॉल के खेल में कई तरह के कौशल की आवश्यकता होती है, जिसे खिलाड़ियों को सीखना होता है।

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 फुटबॉल में कई तरह ड्रिल का उपयोग किया जा रहा है जिनसे खेल सुधरता है।

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इनमें ड्रिब्लिंग, जग्लिंग, पासिंग, शूटिंग,  आदि हैं।

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हॉकी  खेल  का इतिहास काफी पुराना रहा है और  इस खेल में  खिलाड़ियों के  द्वारा कई ड्रिल उपयोग किए जाते रहे हैं।

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जैसे- फर्स्ट टच, लिडिंग, पासिंग आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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क्रिकेट  में समय के साथ काफी  ड्रिल विकसित हुई हैं जो खिलाड़ियों के खेल को निखारने का काम करती हैं।

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क्रिकेट  में  बल्लेबाजी, गेंदबाजी, फील्डिंग और विकेटकीपिंग  विभाग के तहत  अलग - अलग ड्रिल  प्रयोग लाई जाती हैं।

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बल्लेबाजी में सभी  शॉट्स का अभ्यास,  फील्डिंग  के तहत  कैच, स्लिप कैच और  वार्म अप थ्रो का अभ्यास

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गेंदबाजी  में   गति सटीक लाइन  और लेंथ का अभ्यास, विकेटकीपिंग  का अभ्यास भी शामिल है।